Top 10 ayurveda tips for healthy digestive system

Top 10 ayurveda tips for healthy digestive system

1. स्वस्थ और एकाग्र होके खाना :

हमारे आजकल की व्यस्त दिनचर्या में हम सब लोग और हम लोग खाते वक़्त सोचने ल जाते हैं ,इसी वजह से हमारी पाचन प्रकिर्या सही नहीं बैठ पाती है. हमें मस्तिष्क को धयान एकाग्र करके भोजन करना चाहिए . इससे हमारे दिमाग को खाने की सही जानकारी मिलेगी और भोजन को पचने में भी सहायता मिलेगी।

2. अग्नि को भुजाने वाले पदार्थो से परहेज़ :

हमें जरुरत से ज्यादा तरल पदार्थ नहीं खाने चाहिए इससे हमारी पेट की अग्नि ख़राब हो सकती है. ज्यादा मात्रा में कोल्डड्रिंक्स या अन्य कुछ तरल पदार्थ पिने भर से भोजन प्रकिर्या का संतुलन बिगड़ सकता ह। हमें ज्यादा भी नहीं खाना चाहिए और ज्यादा सोना भी नहीं चाहिए ।

3. अपनी अग्नि को सुधारना :

हमें हमेशा अपनी पेट में चल रही अग्नि को ध्यान में भोजन खाना चाहिए । और निरंतर कोसिस करनी चाहिए की उसमे आये दिन सुधर हो ।इससे हमरी उम्र में भी इजाफा होता है और निरंतर दिनचर्या में भी कोई नुक्सान नहीं होता ।

4. अधिक गुणों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना :

हमें हमेशा वही पदार्थ का सेवन करना चाहिए जिसमे उच्च गुण हो जैसे विटामिन, कैल्शियम , आदि आदि ।इससे आपको आपकी पूरी दिनचर्या की लिए प्रयाप्त ऊर्जा मिल जायेगी और बीमारयों से भी बचे रहेंगे । हमें हमेशा उच्च कोटि की फल और सब्जियां खानी चाहिए ।

5. रोज एक ही समय पर खाना :

हमें इस चीज़ का भी धयान रकना चाइये की हम भोजन एक ही समय पर करे । ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता ह पर हमारे सवास्थ की लिए सही होग्गा । इससे हमारा पेट भोजन की सारी पोसन तत्त्व निक्कल क्र उपयोग करता है ।

6. वर्जिश महत्वपूर्ण है :

काफी समाया तक एक ही जगह पर बैठ क्र कार्य करने से हमारी पाचन क्रिया में रूकावट आ जाती है । आयुर्वेद की अनुसार हमें निरंतर व्यायाम करते रहना चाहिए जिससे हमारे सरीर का संतुलन बना रहता है । हमें इसकी निरन्ते आदत बनानी चाहिए।

7. ताज़ी हवा और कुछ आसन :

जिस प्रकार अग्नि को जलने की लिए हवा की जरुरत होती है उसी प्रकार पेट की अग्नि को जलने के लिएभी ताज़ी हवा की जरुरत होती ह ।इस के लिएहमें निरंतर सुबह की सैर करनी चाहिए जिससे की हमारी रोज़ की जरुरत अनुसार हवा की पूर्ति हो सके । इससे हमारे सरीर की अंदर ताजगी बानी रहती है।

8.  ध्यान लगाना :

हमें हमारी रोज़मर्रा की चिंताओं और मस्तिष्क को आराम देने की लिए ध्यान लगाना चाहिए । सिर्फ ५ मिंट का ध्यान हमें काफी लाढ़ देता है। वेदों और आयुर्वेद में ध्यान का बहुत महत्व बताया गया है।

9. सही मात्रा में पानी का सेवन :

हमें रोज़ नियमित रुप्प से पानी का सेवन करना चाहिए जिससे की हमारे सरीर को पोसन तत्वों का निरंतर सेवन मिलता रहे । पानी न केवल पोसन तत्वों को सरीर की हर्र कोने तक पहुंचता है बल्कि कई जरुरी बैक्टेरिआ को सरीर में बनाये रखता है ।हमारे पाचनतंत्र को भी पानी की निररंतर आवशयकता होती ह ।

10. विषहरण क्रिया:

हमारा आयुर्वेद विषहरण प्रकिर्या से पाचनतन्त्र को साफ़ रखने की सलाह भी देता है। इस प्रकिर्या से हम अपनी पाचनकिरया को उच्चतम कोटि तक्क पहुंचा सकते हैं। इसके हर मनुष्य की लिए अलग अलग ारिके हो सकते हैं। हम इसको जूस पीने से लेकर पंचकर्मथेरेपी तक ले क्र जा सकते हैं। इससे पाचनतंत्र की उत्पादकता उच्च कोटि तक्क पहुँच जाती है।

पाचनतंत्र की अंदर की अग्नि हर एक मनुष्य के अंदर ऊर्जा और जोश बढ़ाए रखती है। अगर हम अपने पाचनतंत्र को सही बनाये रखते हैं तो हम अपनी उम्र को बढ़ाते हैं। इसीलिए सभी को अपने पाचन तंत्र की मजबूती को बढाए रखना चाहिए।

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